विशेषता : ठहरने की उत्तम व्यवस्था

महाकाल

कालसर्प योग

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य से लेकर शनि तक सभी ग्रह जब राहु और केतु के मध्य आ जाते हैं तो कालसर्प योग बन जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिस व्यक्ति की जन्म कुण्डली में यह योग होता है उसके जीवन में काफी उतार चढ़ाव आते रहते हैं।
मूल रूप से इस योग को इसलिए देखा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति को झटके में आसमान से ज़मीन पर लाकर खड़ा कर देता है।

क्या है काल सर्प योग?

योतिष के आधार पर काल सर्प दो शब्दों से मिलकर बना है “काल और सर्प”। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार काल का अर्थ समय होता है और सर्प का अर्थ सांप इसे एक करके देखने पर जो अर्थ निकलकर सामने आता है वह है समय रूपी सांप। इस योग को ज्योतिषशास्त्र में अशुभ माना गया है। इस योग को अधिकांश ज्योतिषशास्त्री अत्यंत अशुभ मानते हैं परंतु इस योग के प्रति ज्योतिष के महान विद्वान पराशर और वराहमिहिर चुप्पी साधे हुए हैं।

पंडित राजेंद्र डब्बावाला

श्रीमती माधुरी डब्बावाला