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घर पर भी की जा सकती है कालसर्प दोष की पूजा

प्रत्येक सोमवार को प्रातः सूर्योदय के समय 1 घंटे के भीतर स्नान से निवृत्त हो शुद्धिपूर्वक शिवलिंग पर 11 अक्षत यानी साबुत चावल के दाने ‘श्री राम’ का उच्चारण करते हुए अर्पित करें एवं मन ही मन अपनी विशेष इच्छा का स्मरण करें। लगातार 11 सोमवार ऐसा करने से अवश्य ही वह कार्य आश्चर्यजनक रूप से संपन्न होगा।

एक ही समय एक ही स्थान पर किसी शिवलिंग के ऊपर एक मुट्ठी साबुत गेंहू, एक श्रीफल व एक सिक्का 1, 2, 5, या 10 का जो व्यवहार में प्रचलित हो अर्पण करें। मंत्र ‘श्री राम’ किन्तु जो सिक्का प्रथम सोमवार को लिया है वही संख्या वाला सिक्का हर बार लेना है।

प्रथम गेंहू को अर्पण करें। फिर श्रीफल एवं उस पर सिक्का रख कर अर्पण करें। इस पूरी क्रिया के दौरान श्री राम का जप निरंतर करते रहें।

यह एक चक्र 21 सोमवार तक करें। 21-21 के तीन चक्र संपन्न करें। इसमें 21 सोमवार के बाद एक सोमवार को नागा कर सोमवार से आरम्भ करें।

कुंडली में कालसर्प दोष है तो नाग पंचमी के दिन ऐसे करें निवारण

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प योग है और उसके कारण आपके कई कामों में विघ्न पड़ रहा है तो परेशान न हों। नाग पंचमी का दिन कालसर्प योग की शांति के लिए बेहद फलदायी होता है। पण्डित राजीव शर्मा के अनुसार राहू के जन्म नक्षत्र ‘भरणी’ के देवता काल हैं एवं केतु के जन्म नक्षत्र ‘अश्लेषा’ के देवता सर्प हैं। अतः राहू-केतु के जन्म नक्षत्र देवताओं के नामों को जोड़कर “कालसर्प योग” कहा जाता है। राशि चक्र में 12 राशियां हैं, जन्म पत्रिका में 12 भाव हैं एवं 12 लग्न हैं। इस तरह कुल 144+144 = 288 कालसर्प योग घटित होते हैं। पण्डित राजीव शर्मा के अनुसार 27 जुलाई यानी नाग पंचमी के दिन कालसर्प योग की शांति कराकर विघ्नों को दूर किया जा सकता है। जानें इसके बारे में—
 
नागपंचमी का सिद्ध मुहुर्त
प्रातः 07:01 बजे के बाद 10:30 से अपरान्ह 03:00 बजे तक चर, लाभ, अमृत के चौघड़िये में कालसर्प शांति कराना अति उत्तम रहेगा। वर्ष के मध्य में कालसर्प योग जिस समय बने उस समय अनुष्ठान भी सर्वश्रेष्ठ रहता है।
गोचर में कालसर्प योग का समय
29 अगस्त 2017 प्रातः 05:30 बजे से 04 सितम्बर रात्रि 12: 00 बजे तक, 17 सितम्बर 2017 प्रातः 06:00 बजे से 02 अक्टूबर प्रातः 08:45 बजे तक, 14 अक्टूबर 2017 06:55 बजे से 29 अक्टूबर सांय 06:00 बजे तक, 10 नवम्बर रात्रि 12:30 बजे से 25 नवम्बर रात्रि 02:00 बजे तक, 08 दिसम्बर 2017 प्रातः 11:30 बजे से 23 दिसम्बर प्रातः 08:30 बजे तक एवं 04 जनवरी 2018 सांय 06:50 बजे से 19 जनवरी प्रातः 04:15 बजे तक उपरोक्त समय में भी कालसर्प शांति कराना उत्तम रहेगा।
कालसर्प योग यज्ञ का आरम्भ या समाप्ति पंचमी, अष्टमी, दशमी या चुतुर्दशी तिथिवार चाहें जो भी हो, भरणी, आद्र्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, उत्तराषाढ़ा, अभिजित एवं श्रवण नक्षत्र श्रेष्ठ माने जाते हैं। परन्तु जातक की राशि से ग्रह गणना का विचार करना परम आवश्यक होता है।
कालसर्प योग, पूजा/शांति विधान
प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा के स्थान पर कुश का आसन स्थापित करके सर्व प्रथम हाथ में जल लेकर अपने ऊपर व पूजन सामग्री पर छिड़कें, फिर संकल्प लेकर कि मैं कालसर्प दोष शांति हेतु यह पूजा कर रहा हूं। अतः मेरे सभी कष्टों का निवारण कर मुझे कालसर्प दोष से मुक्त करें। तत्पश्चात् अपने सामने चौकी पर एक कलश स्थापित कर पूजा आरम्भ करें। कलश पर एक पात्र में सर्प-सर्पनी का यंत्र एवं कालसर्प यंत्र स्थापित करें, साथ ही कलश पर तीन तांबे के सिक्के एवं तीन कौड़ियां सर्प-सर्पनी के जोड़े के साथ रखें, उस पर केसर का तिलक लगायें, अक्षत चढ़ायें, पुष्प चढ़ायें तथा काले तिल, चावल व उड़द को पकाकर शक्कर मिश्रित कर उसका भोग लगायें, फिर घी का दीपक जला कर निम्न मंत्र का उच्चारण करेंः-
ऊं नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु।
ये अंतरिक्षे ये दिवितेभ्यः सर्पेभ्यो नमः स्वाहा।।
राहु का मंत्र- ऊं भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
अब गणपति पूजन करें, नवग्रह पूजन करें, कलश पर रखी समस्त नाग-नागिन की प्रतिमा का पूजन करें व रूद्राक्ष माला से उपरोक्त कालसर्प शांति मंत्र अथवा राहू के मंत्र का उच्चारण एक माला जाप करें। उसके पश्चात् कलश में रखा जल शिवलिंग पर किसी मंदिर में चढ़ा दें, प्रसाद नंदी (बैल) को खिला दें, दान-दक्षिणा व नये वस्त्र ब्राह्मणों को दान करें। कालसर्प दोेष वाले जातक को इस दिन व्रत अवश्य करना चाहिए।
अग्नि पुराण में लगभग 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन मिलता है, जिसमें अनन्त, वासुकी, पदम, महापध, तक्षक, कुलिक, कर्कोटक और शंखपाल यह प्रमुख माने गये हैं। स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण तथा कर्मपुराण में भी इनका उल्लेख मिलता है।

काल सर्प दोष निवारण हेतु अचूक उपाय, मंत्र, पूजा की विधि

कई लोग हमसे ये जानना चाहते हैं की काल सर्प दोष क्या है और यह कितने प्रकार का होता है और इसके प्रभाव यानि लक्षण क्या हैं तो सबसे पहले काल सर्प योग के बारे में जान लें| उसके बाद आपको इसके कारण लक्षण और निवारण के अचूक उपाय, मंत्र और पूजा की विधि के बारे में बताया जाएगा|

क्या हैं काल सर्प दोष या योग?| काल सर्प योग होने का कारण

साधारण शब्दों में काल सर्प दोष एक दोष हैं जो की व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार के दुर्भाग्य के लिए जिम्मेदार होता है जिसके फलसवरूप व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की मुश्किलें और रुकावटें आती हैं| आपकी कुंडली और राशी के आधार पर काल सर्प योग अल्पकालिक या दीर्घकालिक यानि आपकी कुंडली में ग्रहों की स्तिथि के आधार पर या कुछ सालों के लिए या पूरी उम्र के लिए हो सकता है| हिन्दू मानयता के अनुसार काल सर्प योग बनने का कारण है पिछले जन्म में किये गए पापों का फल| यानि कुल मिलाकर यह पिछले जनम में किये गए बुरे कर्मों का इस जनम में मिलने वाला फल होता है जो की व्यक्ति के जीवन में कष्ट और दुर्भाग्य लेकर आता है|

काल सर्प दोष के प्रकार और प्रभाव (लक्षण)

काल सर्प दोष मुख्या रूप से १२ प्रकार के होते हैं| निचे हम काल सर्प योग के प्रकार और उसके जातक पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताने जा रहे हैं|

इन दिव्य स्थानों पर दिलवाई जाती है कालसर्प जैसे भयंकर दोष से मुक्ति

1. ज्योतिष विद्या

जो लोग ज्योतिष विद्या पर भरोसा करते हैं वे इस बात से भली-भांति अवगत हैं कि कुंडली में कुछ ग्रहीय योग ऐसे बनते हैं जिन्हें अगर दोष कहा जाए तो गलत नहीं होगा। ऐसा ही एक योग या दोष है कालसर्प योग।

2. राहु और केतु

यह योग तब बनता है जब कुंडली के ग्रह राहु और केतु के बीच आकर फंस जाते हैं, जिसकी वजह से वह पूरी तरह प्रभावहीन हो जाते हैं। इतना ही नहीं जिस भाव पर वो बैठे हैं वो भाव किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं कर पाता।

3. कालसर्प दोष

मसलन अगर यह कालसर्प दोष कुंडली के बाएं भाग पर बनता है, जो कि किसी भी जातक की कुंडली में उसके निजी जीवन से संबंधित है, तो उसका निजी जीवन (जिसमें परिवार और प्रेम शामिल हैं) की खुशियां समाप्त हो जाती हैं।

4. कालसर्प दोष

वहीं अगर यह कालसर्प दोष दाहिने भाग पर है तो भाग्य के साथ-साथ व्यवसाय और धन आगमन भी समाप्त हो जाता है। इसलिए यह सुझाव दिया जाता है कि अगर किसी जातक को यह पता है कि उसकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो उसे तुरंत ही किसी अच्छे ज्योतिषाचार्य की सहायता से इस दोष का निवारण करवा लेना चाहिए।

5. कालसर्प दोष निवारण

भारत में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां कालसर्प दोष निवारण से संबंधित पूजा की जाती हैं। इस लेख के जरिए हम आपको उन्हीं दिव्य स्थानों के विषय में बताएंगे जहां अगर आप कालसर्प की पूजा करवाएंगे तो यह अवश्य ही फलदायी रहेगी, बशर्ते जिनसे आप पूजा करवा रहे हैं वे इससे संबंधित जानकारी रखते हों।