पंडित राजेंद्र डब्बावाला, उज्जैन
ठहरने की उत्तम व्यवस्था भी उपलब्ध है
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कालसर्प दोष

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कुंडली में पितृ दोष

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मंगल दोष

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हमारे बारे में

पंडित राजेंद्र डब्बावाला (त्रिवेदी) शहर के उन प्रमुख अनुष्ठान कर्ताओं में से एक हैं, जिनकी ख्याति उज्जैन ही नहीं, देश में भी नगर का नाम गौरवान्वित कर रही है। श्री त्रिवेदी (डब्बावाला) द्वारा समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये जाते हैं। ऐसे एक नहीं कई जातक हैं, जिन्हें पंडित त्रिवेदी (डब्बावाला) के मार्गदशन से लाभ मिला है तथा मनचाहे फल की प्राप्ति हुई है।

जीवन की हर समस्या पर धार्मिक कर्मकांड के माध्यम से लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह प्रमाणित तथा शास्त्रोक्त भी है। पंडित श्री त्रिवेदी (डब्बावाला) एवं उनके परिजनों द्वारा सभी प्रकार के दोषों जैसे– कालसर्प, नागबली, नारायणबली दोष, नवग्रह शान्ति दोष, मांगलिक दोष, गृह शांति आदि समस्यायों का निवारण वैदिक एवं शस्त्रोक्त विधि से किया जाता है !

श्री त्रिवेदी (डब्बावाला) के अनुसार विदेशों के जातक भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर फल प्राप्त करते हैं।

कुछ विशेष पूजाएं जो हम करवाते हैं

जैसे-

रुद्राभिषेक तथा महा-रुद्राभिषेक.

रुद्र अर्थात भूतभावन शिव का अभिषेक। शिव और रुद्र परस्पर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही ‘रुद्र’ कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी कि भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।

हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा Read more

नवग्रह दोष निवारण.

अक्सर लोगों को कहते सुना होगा कि ‘समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता’ ज्योतिषशास्त्र भी मानता है कि ग्रहों की दशा, ग्रहों की चाल का प्रभाव जातक पर पड़ता है। जातक की जन्मतिथि, जन्म स्थान एवं जन्म के समयानुसार उसकी कुंडली बनती है जिसमें 9 ग्रहों की दशा का विवरण होता है  Read more

कुंभ विवाह / घट विवाह तथा अर्क विवाह.

कुम्भ विवाह का अर्थ है ‘घट या घड़े’ के साथ विवाह। यदि कन्या की कुंडली में मंगल दोष का परिहार नहीं हो रहा हो या वैधव्य योग हो तो कुम्भ विवाह इस का परिहार है।

कुम्भ विवाह या घाट विवाह की विधि  :

इस प्रक्रिया  में  कन्या और मिट्टी  Read more

पिण्ड दान.

पिंडदान का क्या अर्थ है ?

मृतक के निमित्त अर्पित किए जाने वाले पदार्थ जैसे पके हुए चावल, दूध और तिल को मिश्रित करके जो पिण्ड बनाते हैं, उसे ‘सपिण्डीकरण’ कहते हैं. पिण्ड का अर्थ है शरीर. Read more

नारायणबलि पूजा.

क्या है नारायणबलि ?

नारायणबलि का मुख्य उद्देश्य पितृदोष निवारण करना है।

इन कारणों से की जाती है Read more

ठहरने की उत्तम व्यवस्था भी उपलब्ध है